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पाबौ ग्वाड़ीगाड़ गांव बना मत्स्य ग्राम, किसानों की मेहनत से बदली गांव की तस्वीर

पौड़ी/ 15 जून, 2025:

रिपोर्ट कुलदीप रावत 

ग्वाड़ीगाड़ गांव बना मत्स्य ग्राम, किसानों की मेहनत से बदली गांव की तस्वीर

 

युवाओं के लिए विपिन पंत मत्स्य पालन कर रिवर्स पलायन के लिये बने उदाहरण

 

स्वरोजगार की उम्मीद बना ग्वाड़ीगाड़, एक तालाब से बनाये 36 तालाब

पौड़ी जनपद के पाबौ ब्लॉक का एक छोटा-सा गांव ग्वाड़ीगाड़ आज पूरे क्षेत्र में मत्स्य ग्राम के नाम से पहचाना जाने लगा है। यहां के छह किसानों ने मिलकर जो काम किया है, वह न केवल स्वरोजगार का नया रास्ता खोलता है, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।

 

स्वयं सहकारिता मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत के द्वारा इन युवाओं के गांव में जाकर इन सभी के प्रयास की सराहना की गई

 

 

गांव के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन कर रहे हैं। गांव में कुल 36 मछली तालाब तैयार किये गये हैं, जिनमें तिलापिया और पंगास जैसी अधिक उत्पादन देने वाली मछलियों का पालन किया जा रहा है। इस कार्य को गांव में छह सदस्यों द्वारा क्लस्टर आधारित पर किया जा रहा है, जिन्होंने नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से ऋण प्राप्त कर अपने सपनों को आकार दिया।

 

इस पूरी पहल की शुरुआत गांव के युवा किसान विपिन पंत ने वर्ष 2022 में एक छोटे से तालाब से की थी। शुरुआती सफलता के बाद उन्होंने मत्स्य विभाग के सहयोग से अपने कार्य को विस्तार दिया और 20 तालाब बनाये। उन्होंने गांव के अन्य युवाओं को भी प्रेरित किया और उन युवाओं द्वारा गांव में 16 तालाब तैयार किये और सभी मिलकर अब व्यवस्थित मत्स्य पालन कर रहे हैं।

 

विपिन पंत बताते हैं कि पिछले वर्ष 8 कुंतल मछली का उत्पादन किया गया था, जिससे अच्छी आय हुयी। इस वर्ष 22 हजार मछली बीज तालाबों में डाले गए हैं और 15 से 20 कुंतल मछली उत्पादन की संभावना है। अक्टूबर माह में मछलियों को विक्रय हेतु निकाला जायेगा। इसके साथ–साथ विपिन मुर्गी पालन से भी अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं और हाल ही में पांच महीनों में लगभग 85 हजार रुपये के अंडों की बिक्री कर चुके हैं।

 

मत्स्य अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत विपिन पंत व अन्य पांच सदस्यों को क्लस्टर आधारित मत्स्य तालाब निर्माण के लिये 5.475 रूपये लाख का अनुदान क्लस्टर तालाब निर्माण के लिए तथा 2.7 रूपये लाख की सहायता बायोफ्लॉक तालाब के लिये दी गयी है। साथ ही मत्स्य व्यापार को सुगम बनाने के लिये उन्हें विभाग की ओर से एक मोटरसाइकिल भी प्रदान की गयी है। साथ ही उन्होंने कहा कि ग्वाड़ीगाड़ गांव आज मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक उदाहरण बन गया है। यहां के किसानों ने यह दिखाया है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी यदि योजना, तकनीक और मेहनत को साथ लाया जाए, तो सफलता सुनिश्चित है।

 

 

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