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गाय के गोबर से बने उत्पादों से संवर रही महिलाओं की आजीविका, चमराड़ा की 450 महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर

गाय के गोबर से बने उत्पादों से संवर रही महिलाओं की आजीविका, चमराड़ा की 450 महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर

ग्रामोत्थान के सहयोग से तैयार हो रहे धूप, हवन कप, दीपक और देवी-देवताओं की मूर्तियां; अब तक सात लाख रुपये का कारोबार

पौड़ी/05 नवंबर 2026
ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और सामूहिक प्रयास से गाय का गोबर आज आजीविका का सशक्त माध्यम बन रहा है। विकासखंड खिर्सू के चमराड़ा में ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से भूमि स्वायत्त सहकारिता से जुड़ी महिलाएं गोबर से विभिन्न उपयोगी एवं सजावटी उत्पाद तैयार कर रही हैं। पारंपरिक संसाधनों को नए स्वरूप में ढालकर महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं।

चमराड़ा क्लस्टर के अंतर्गत 25 गांवों के 15 ग्राम संगठनों से जुड़ी 450 महिलाएं इस पहल का हिस्सा हैं। महिलाएं गाय के गोबर से धूप, हवन कप, दीपक और देवी-देवताओं की मूर्तियां तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की मांग विभिन्न शहरों में बढ़ रही है, जिससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

ग्रामोत्थान परियोजना के प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के उपयोग से स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें बाजार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि चमराड़ा की महिलाएं सामूहिक प्रयासों से गोबर जैसे पारंपरिक संसाधन को उपयोगी उत्पादों में बदलकर ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल पेश कर रही हैं। परियोजना के सहयोग से उत्पाद निर्माण और विपणन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं की आय में वृद्धि के साथ उनकी आत्मनिर्भरता भी मजबूत हो रही है।

भूमि स्वायत्त सहकारिता, न्याय पंचायत चमराड़ा के बिजनेस प्रमोटर दीपक शाह के अनुसार, इकाई की स्थापना के बाद से अब तक लगभग सात लाख रुपये का कारोबार हो चुका है। सहकारिता द्वारा ग्रामीण महिलाओं से 20 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जा रहा है। इससे महिलाओं को घर के आसपास उपलब्ध संसाधनों से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। उत्पाद निर्माण और विपणन गतिविधियों के माध्यम से कुछ महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।

ग्रामोत्थान परियोजना द्वारा इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए छह लाख रुपये की सहायता दी गई है। इसके अतिरिक्त फेडरेशन ने तीन लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर उद्यम को मजबूत किया है। वित्तीय सहयोग से उत्पाद निर्माण, विपणन और कारोबार के विस्तार को गति मिली है।

चमराड़ा में तैयार उत्पाद पौड़ी, श्रीनगर, कोटद्वार, देहरादून, हरिद्वार सहित विभिन्न शहरों में पहुंच रहे हैं। दीपावली के अवसर पर धूप, हवन कप और दीपकों की मांग में विशेष वृद्धि हुई है। वर्तमान में विभिन्न संस्थानों और विक्रय केंद्रों से कुल 1.41 लाख रुपये के उत्पादों की मांग प्राप्त हुई है। इनमें श्रीनगर, कृष्णायन गौ सेवा संस्थान हरिद्वार, अंजलि स्टोर श्रीनगर, कीर्तिनगर ब्लॉक एनआरएलएम, हिलांस आउटलेट, क्वालिटी बास्केट श्रीकोट तथा नाबार्ड आधार सेंटर हिंडोला खाल शामिल हैं।

चमराड़ा की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण है। सामूहिक प्रयास, संस्थागत सहयोग और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर रही हैं। गाय के गोबर जैसे पारंपरिक संसाधन से तैयार उत्पाद अब उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और ग्रामीण उद्यमिता की नई पहचान बन रहे हैं।

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